समाज और हम
✍️✍️समाज में नाम पाने की चाह ,अपने परिवार से दूर रहकर औरों के साथ मशगूल रहना क्या आपको दुनिया की नजरों में अच्छा साबित कर सकता है । राजनीति का काम उन्हीं लोगों का हो सकता है जिनके पेट भरे हुए हैं वरना मध्यमवर्गीय इंसान को अपने परिवार के पालन पोषण से ही समय निकालना बहुत मुश्किल है ।आप समाज सेवा भी बिना पैसों के कब तक कर सकते हैं क्योंकि उसके लिए भी आर्थिक रूप से सुदृढ़ होना जरूरी है । फिर क्यों आज औरों की देखा देखी अपने परिवार की चिंता किये बिना सो कॉल्ड समाज सेवा में लगे रहते हैं ? क्या जरूरत के समय आपके कोई एक भी काम आ सकता है ? नहीं न क्योंकि आज मतलब की दुनिया है ,आप अपने एक छोटे से काम की भी किसी से कहकर देखो कोई साथ नहीं आएगा ।फिर क्यों और कैसी समाज सेवा? आपका अपना परिवार रोता रहे और आप सिर्फ अपने बारे ही सोचें ,ये कैसी सोच है आज के युवाओं की ? यदि आपमें अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी का भाव नहीं ,समाज से या खुद के हालत से लड़ने का जज्बा नहीं तो आप कायर हैं । जीवन किसी का भी आसान नहीं ,जिंदगी में बहुत उतार चढ़ाव आते हैं इसका मतलब ये तो नहीं कि आप अपनी जिम्मेदारियों से मुँह छिपाकर भाग लें ?
वर्ष वार्ष्णेय अलीगढ़
Versha Varshney
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