versha varshney {यही है जिंदगी } जय श्री कृष्णा मित्रो, यही है जिंदगी में मैंने मेरे और आपके कुछ मनोभावों का चित्रण करने की छोटी सी कोशिश की है ! हमारी जिंदगी में दिन प्रतिदिन कुछ ऐसा घटित होता है जिससे हम विचलित हो जाते हैं और उस अद्रश्य शक्ति को पुकारने लगते हैं ! हमारे और आपके दिल की आवाज ही परमात्मा की आवाज है ,जो हमें सबसे प्रेम करना सिखाती है ! Bec Love iS life and Life is God .
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Thursday, 10 May 2018
७२,डर
डर ****
किसी को खोने का डर ,किसी के डांटने का डर ,किसी के गुस्सा हो जाने का डर ,बचपन को जिसने दबा दिया उस व्यक्ति का डर ,जिंदगी को नरक बना देता है । कोई नहीं समझ सकता अनाथ बच्चों का दर्द ,जिसने कभी उस डर को महसूस ही नहीं किया वो कैसे समझ पायेगा उस दर्द को ,बैचैनी को ।जो दूसरों के दर्द को समझ पाए ,दुनिया में ऐसे लोग विरले ही होते हैं ।
माँ का साया ही बच्चे को निडर बनाता है बाकी तो दुनिया हर कदम पर डराती है । जाने क्यों और किस पाप की सजा मिली थी उसे जिसने उसकी स्वाभाविकता को कभी का छीन लिया था । जब भी वो कदम बढ़ाती वो आकर उसे डरा देती । देखा है जीवन में उसको खुद से लड़ते हुए ,अपने अकेलेपन से बातें करते हुए । अनाथ थी वो ,दुनिया के रहमोकरम पर पलते पलते कब बड़ी हो गयी ,पता ही नहीं लगा । आज भी हर छोटी बात पर जैसे सहम जाती है ।आप यदि किसी बच्चे को गोद लेते हैं या पालते हैं तो कृपया उसके दिल मे इतना डर न पनपने दें कि वो अपनी जिंदगी को जीना ही भूल जाये ।आज किसी अनाथ बच्चे को गोद लेना जैसे समाज में अपना रुतबा बढ़ाना है ।क्या आप उसे माँ बाप का प्यार दे सकते है ?क्या उसे एक सहज जिंदगी दे सकते है ?यदि हां तभी अपने कदम आगे बढ़ाएं वरना इसके लिए अनाथाश्रम ही बहुत हैं ।
जिंदगी को जिंदगी ही रहने दें ,
मजाक न बनाएं ।
टूट न जाए कही किसी का दिल
तोड़कर कांच को धार न बनाएं ।
किसी को खोने का डर ,किसी के डांटने का डर ,किसी के गुस्सा हो जाने का डर ,बचपन को जिसने दबा दिया उस व्यक्ति का डर ,जिंदगी को नरक बना देता है । कोई नहीं समझ सकता अनाथ बच्चों का दर्द ,जिसने कभी उस डर को महसूस ही नहीं किया वो कैसे समझ पायेगा उस दर्द को ,बैचैनी को ।जो दूसरों के दर्द को समझ पाए ,दुनिया में ऐसे लोग विरले ही होते हैं ।
माँ का साया ही बच्चे को निडर बनाता है बाकी तो दुनिया हर कदम पर डराती है । जाने क्यों और किस पाप की सजा मिली थी उसे जिसने उसकी स्वाभाविकता को कभी का छीन लिया था । जब भी वो कदम बढ़ाती वो आकर उसे डरा देती । देखा है जीवन में उसको खुद से लड़ते हुए ,अपने अकेलेपन से बातें करते हुए । अनाथ थी वो ,दुनिया के रहमोकरम पर पलते पलते कब बड़ी हो गयी ,पता ही नहीं लगा । आज भी हर छोटी बात पर जैसे सहम जाती है ।आप यदि किसी बच्चे को गोद लेते हैं या पालते हैं तो कृपया उसके दिल मे इतना डर न पनपने दें कि वो अपनी जिंदगी को जीना ही भूल जाये ।आज किसी अनाथ बच्चे को गोद लेना जैसे समाज में अपना रुतबा बढ़ाना है ।क्या आप उसे माँ बाप का प्यार दे सकते है ?क्या उसे एक सहज जिंदगी दे सकते है ?यदि हां तभी अपने कदम आगे बढ़ाएं वरना इसके लिए अनाथाश्रम ही बहुत हैं ।
जिंदगी को जिंदगी ही रहने दें ,
मजाक न बनाएं ।
टूट न जाए कही किसी का दिल
तोड़कर कांच को धार न बनाएं ।
Thursday, 26 April 2018
६९,एक शाम नीरज जी के साथ
ॐ नमः शिवाय(22/4/18)
"आगमन " द्वारा प्रकाशित गीत ऋषि पद्मभूषण परम श्रदेय डॉ गोपाल दास 'नीरज' जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर पुस्तक "नीरज ...एक जीवित किंवदंती"के लोकार्पण दिवस पर एक यादगार शाम गीतों के महान लेखक नीरज जी के साथ उनके निवास स्थान पर । एक यादगार कवि गोष्ठी आगमन समूह और सदी के महान लेखक आदरणीय नीरज जी के साथ। उनके सानिध्य में अपनी कविता सुनाने का अविस्मरणीय पल ।उनका आशीर्वाद और सराहना पाकर दिल बाग बाग हो गया । आदरणीय पवन जैन सर ,डॉ अशोक मधुप जी , कवयित्री कीर्ति काले जी ,डॉ स्वीट एंजेल , प्रिया सिन्हा ,डॉ कविता गुप्ता , मनीषा जोशी ,विनोद कुमार वर्मा ,मनोज कामदेव डॉ दिनेश कुमार शर्मा व अन्य कवियों के साथ आपकी मित्र वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़ ।
"आगमन " द्वारा प्रकाशित गीत ऋषि पद्मभूषण परम श्रदेय डॉ गोपाल दास 'नीरज' जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर पुस्तक "नीरज ...एक जीवित किंवदंती"के लोकार्पण दिवस पर एक यादगार शाम गीतों के महान लेखक नीरज जी के साथ उनके निवास स्थान पर । एक यादगार कवि गोष्ठी आगमन समूह और सदी के महान लेखक आदरणीय नीरज जी के साथ। उनके सानिध्य में अपनी कविता सुनाने का अविस्मरणीय पल ।उनका आशीर्वाद और सराहना पाकर दिल बाग बाग हो गया । आदरणीय पवन जैन सर ,डॉ अशोक मधुप जी , कवयित्री कीर्ति काले जी ,डॉ स्वीट एंजेल , प्रिया सिन्हा ,डॉ कविता गुप्ता , मनीषा जोशी ,विनोद कुमार वर्मा ,मनोज कामदेव डॉ दिनेश कुमार शर्मा व अन्य कवियों के साथ आपकी मित्र वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़ ।
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