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Sunday, 15 December 2019

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लेखन मतलब -दिल को सुकून ।
कुछ लोग किसी के लेखन को उसकी व्यक्तिगत लाइफ से जोड़ने लगते हैं ।हर व्यक्ति अपनी बात को लिखने के लिए स्वतंत्र है ।क्या लेखन का कार्य किसी सीमा में बांधकर किया जा सकता है ।दुनिया में महान साहित्यकार और कवि हुए हैं ।क्या वो किसी की बंदिश में रहकर लिख सकते थे ?नहीं । वो लेखन आनन्ददायक कैसे हो सकता है जो किसी परिधि या बंदिश में रहकर किया जाए ।मैं नारी हूँ तो मेरे लिए इतनी बंदिशें क्यों ? मेरी कलम स्वतंत्र है और स्वतंत्र ही रहेगी आपको कैसा लगता है ,ये आपके ऊपर निर्भर है/
 
पुरुष यदि किसी लेडी को लिफ्ट दें तो इसमें उनकी शान लेकिन यदि उनकी पत्नी किसी से लिफ्ट ले तो शान के खिलाफ।
दोहरे मापदंड ?

खुद को ऊँचा दिखाने की 
जद्दोजहद ने कमाल कर दिया ,
Fb ने छोटे बड़े सबको समान कर दिया ।

ये कैसा समाज है जो आज भी सिर्फ और सिर्फ औरत को ही प्रताड़ित करता है ,जितने ऊंचे घर उतनी ही बंदिशें ......


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