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Sunday, 15 December 2019

10 रचना 



#ये दुनिया भी अजीब है जब जीना चाहो तो जीने नहीं देती। जब चलना चाहो तो चलने नहीं देती। जब रोना चाहो तो रोने नहीं देती ।जब हँसना चाहो तो हँसने नहीं देती ।#

#अक्सर रास्तों पर चलते चलते
कदम बहक जाते हैं ,
साहिल पर पहुंचने की जिद में
मंजिलों पर कदम फिसल जाते हैं ।#

#उदासी की घनी चादर में ,
सुकून चाहती है जिंदगी।।
खिलखिलाती हँसी की ओट में ,
अनचाहे आँसूं कपोलों पर
निशान बना जाते हैं ।#

#थके पंछी जोड़कर तिनकों को ,
अक्सर खुद ही उलझ जाते हैं ।
सपनों की ऊँचा उड़ान में ,
खुद को घायल कर जाते हैं ।#
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

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